हिंदू परंपरा में पितरों का श्राद्ध और तर्पण परिवार का कर्तव्य माना गया है। जब कई पीढ़ियों से नियमित श्राद्ध न हो पाया हो, या परिवार में बार-बार बाधाएँ आ रही हों, तो विद्वान त्रिपिंडी श्राद्ध करवाने की सलाह देते हैं।
त्रिपिंडी श्राद्ध में क्या होता है
इसमें तीन पीढ़ियों के पितरों के निमित्त तीन पिंड बनाकर विधि-विधान से श्राद्ध किया जाता है। ब्रह्मा, विष्णु और महेश का पूजन होता है और अंत में ब्राह्मण भोजन व दान किया जाता है।
कहाँ करवाया जाता है
- काशी में गंगा तट और पिशाचमोचन कुंड
- त्र्यंबकेश्वर (नासिक)
- गया जी, हरिद्वार, मथुरा और उज्जैन
तिथि कैसे चुनें
अमावस्या, पितृ पक्ष और कुछ विशेष तिथियाँ पितृ कार्य के लिए श्रेष्ठ मानी जाती हैं। सही तिथि यजमान की कुंडली और पंचांग देखकर तय की जाती है।
यदि आप त्रिपिंडी श्राद्ध करवाना चाहते हैं, तो तिथि, स्थान और पूरी व्यवस्था के लिए आचार्य जी से संपर्क करें।
— आचार्य पं. जयराम शर्मा, काशी विश्वनाथ ज्योतिष केन्द्र