
कुंडली में जब सूर्य से शनि तक के सभी सात ग्रह राहु और केतु के बीच एक ही ओर आ जाते हैं, तो उसे काल सर्प योग कहा जाता है।
हर कुंडली में डरने की बात नहीं
यह योग कितना असर करेगा, यह लग्न, ग्रहों की ताकत और दशा पर निर्भर करता है। इसलिए केवल नाम सुनकर घबराने के बजाय किसी जानकार से कुंडली दिखाना ज़रूरी है।
शांति पूजा कहाँ
- त्र्यंबकेश्वर — काल सर्प शांति के लिए सबसे प्रसिद्ध
- उज्जैन — महाकाल की नगरी
- ज़रूरत हो तो आपके स्थान पर भी
पूजा से पहले
शुभ तिथि, यजमान का नाम और गोत्र, और पूजा सामग्री की जानकारी पहले से ले लें। वेबसाइट की ऑनलाइन कुंडली से आप प्रारंभिक संकेत देख सकते हैं; पक्की पुष्टि आचार्य जी करेंगे।
— आचार्य पं. जयराम शर्मा, काशी विश्वनाथ ज्योतिष केन्द्र