कुंडली में कुछ ग्रह-योगों को पितृ दोष कहा जाता है। आचार्य जी पहले कुंडली देखकर बताते हैं कि दोष है या नहीं।
दोष होने पर तीर्थ पर तर्पण, पिंडदान और शांति अनुष्ठान करवाया जाता है — काशी, गया जी, हरिद्वार, मथुरा, उज्जैन या आपके स्थान पर।
मुख्य बातें
- कुंडली से दोष की जाँच
- तर्पण और पिंडदान
- तीर्थ या आपके स्थान पर
- अमावस्या पितृ कार्य हेतु विशेष