कुंडली में कोई ग्रह अशुभ स्थिति में हो या उसकी दशा चल रही हो, तो उसके लिए शास्त्रों में जाप, दान और हवन के उपाय बताए गए हैं।
शनि की साढ़ेसाती, राहु-केतु, मंगल दोष और नवग्रह शांति के अनुष्ठान आचार्य जी विधि-विधान से करवाते हैं।
इस सेवा में
- शनि साढ़ेसाती व ढैय्या
- राहु-केतु शांति
- मंगल दोष परिहार
- नवग्रह जाप व हवन



